कौन फूल कैसा है..सचिन तितलियाँ समझती हैं….
आज कल के लड़कों को ये लडकियां समझती हैं…..
चाहतों के रंगों से सचिन और दिल के कोरे कागज़ पर……..
किसका नाम लिखना है….अंगुलियाँ समझतीं हैं….
चुप कहाँ पर रहना है….सचिन और किस जगह खनकना है…..
जानते हैं..ये कंगन के चूडियाँ समझतीं हैं….
आंसुओं को आँखों मैं कैद करके रखा है..सचिन …
किस जगह बरसना है…के बदलियाँ समझती हैं…
हसरतें हैं क्या दिल मैं सचिन ….खुल के कह नही पातीं….
बाप की गरीबी को सचिन ….बस ये बेटियाँ समझतीं हैं.
Sunday, September 27, 2009
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anu
ReplyDeletePlease do not steal other's composition.
ReplyDeleteCompose Your Own...