तुम ख़्यालो में हमको बुलाया करो , हम हक़ीकत में एक दिन चले आएगे,
यूँ तुम बिन तो ख़ामोश आवाज़ है ,तुम से हमको हैं करनी कई बातें पर , तुम हमे अपने किस्से सुनाया करो , हम तुम्हारे ही क़िस्सों में चले आएगे
खड़े हैं हर मोड़ पे मुंतजिर से हम ,कभी तुम जो गुजरो किसी मोड़ से ,अपनी नज़रो से हर और देखा करो ,हम तुम्हे वही पे कही नज़र आएगे
कभी जब लगे तुम को तन्हाई सी ,या कही पे कभी सुकून ना मिले ,तुम हमे नाम लेके पुकारा करो ,हम उसी वक़्त मिलने चले आएगे
कभी लड़खड़ाते क़दमो से रुक ने लगो ,तुम मुझे याद कर अपना सहारा बनो ,और हमसफर हमे बुलाया करो ,हम साथ तुम्हारा देने चले आएगे
कभी जब परेशान दुनिया करे ,या कोई बात तुम्हे सताया करे ,बेवजह तुम यूँही मुस्कुराया करो ,हम हँसी तेरी सुन के चले आएगे
ख़ामोशी में जब लगे घड़ी ग़ुज़ने ,अंधेरो में जब डूब जाए जंहा ,तुम अपने घर में ”दीप“ जलाया करो ,हम तुन्हे उसमे ही रोशन नज़र आएगे
Sunday, September 27, 2009
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