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Saturday, August 8, 2009

बदल नहीं सकता जिन्हें, ऐसे है हालात मेरे,
सुकून कहीं मिलता नहीं, दिल ने दी आवाज मेरे….

उम्र बढ़ रही है, वक़्त का तकाजा है,
आस है क्यूँ जीनेकी, सवाल यह सताता है,
मिलने की आरजू से, काटे दिन इंतजार में तेरे ,
सुकून कहीं मिलता नहीं, दिल ने दी आवाज मेरे….

टिमटिमाते जुगनू भी, अँधेरे में हिम्मत दिखाते है,
मेंढक भी बारिश में, जोरों से टरटराते है,
निकलते क्यूँ नहीं दिलसे, दर्द के अल्फाज तेरे,
सुकून कहीं मिलता नहीं, दिल ने दी आवाज मेरे….

सन्नाटा रातका कहता है कुछ, मेरी आँखों की नमीसे,
रंग चुके है किस स्याहीसे,नजाने दस्तावेज जिंदगीके,
कटघरें में खड़े है आज तो, अपनेही जज्बात मेरे,
सुकून कहीं मिलता नहीं, दिल ने दी आवाज मेरे….

बदल नहीं सकता जिन्हें, ऐसे है हालात मेरे,
सुकून कहीं मिलता नहीं, दिल ने दी आवाज मेरे….

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