अगर तुम मिल जाओ, जमाना छोड देंगे हम
तुम्हें पा कर जमाने भर से रिश्ता तोड देंगे हम
बिना तेरे कोई दिलकश नजारा हम ना देखेंगे
तुम्हें ना हो पसंद उस को दोबारा हम ना देखेंगे
तेरी सूरत ना हो जिस में, वो शिशा तोड देंगे हम
तेरे दिल में रहेंगे, तुझ को अपना घर बना लेंगे
तेरे ख्वाबों को गहनों की तरह खुद पर सजा लेंगे
कसम तेरी कसम तकदीर का रूख मोड देंगे हम
तुम्हें हम अपने जिस्म-ओ-जान में कुछ ऐसे बसा लेंगे
तेरी खुशबू अपने जिस्म की खुशबू बना लेंगे
खुदा से भी ना जो टूटे वो रिश्ता जोड लेंगे हम
Saturday, October 17, 2009
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