Text selection Lock by Hindi Blog Tips

Sunday, September 27, 2009

माना वो ज़िंदगी हैं मेरी

सफ़र के बाद अफ़साने ज़रूरी हैं ना भूल पाए वो दीवाने ज़रूरी हैं
जिन आँखों में हँसी का धोखा हो उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं
माना के तबाह किया उसने मुझे , मगर रिश्ते निबाहने ज़रूरी हैं
ज़ख़्म दिल के नासूर ना बन जाए मरहम इन पे लगाने ज़रूरी हैं
माना वो ज़िंदगी हैं मेरी लेकिन , पर दूर रहने के बहाने ज़रूरी हैं
इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं, इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं
महफ़िल में रंग ज़माने के लिए , दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है
रात रोशन हुई जिनसे ,सारी , सुबह वो दीप बुझाने ज़रूरी हैं

तुम ख़्यालो में

तुम ख़्यालो में हमको बुलाया करो , हम हक़ीकत में एक दिन चले आएगे,
यूँ तुम बिन तो ख़ामोश आवाज़ है ,तुम से हमको हैं करनी कई बातें पर , तुम हमे अपने किस्से सुनाया करो , हम तुम्हारे ही क़िस्सों में चले आएगे
खड़े हैं हर मोड़ पे मुंतजिर से हम ,कभी तुम जो गुजरो किसी मोड़ से ,अपनी नज़रो से हर और देखा करो ,हम तुम्हे वही पे कही नज़र आएगे
कभी जब लगे तुम को तन्हाई सी ,या कही पे कभी सुकून ना मिले ,तुम हमे नाम लेके पुकारा करो ,हम उसी वक़्त मिलने चले आएगे
कभी लड़खड़ाते क़दमो से रुक ने लगो ,तुम मुझे याद कर अपना सहारा बनो ,और हमसफर हमे बुलाया करो ,हम साथ तुम्हारा देने चले आएगे
कभी जब परेशान दुनिया करे ,या कोई बात तुम्हे सताया करे ,बेवजह तुम यूँही मुस्कुराया करो ,हम हँसी तेरी सुन के चले आएगे
ख़ामोशी में जब लगे घड़ी ग़ुज़ने ,अंधेरो में जब डूब जाए जंहा ,तुम अपने घर में ”दीप“ जलाया करो ,हम तुन्हे उसमे ही रोशन नज़र आएगे
कौन फूल कैसा है..सचिन तितलियाँ समझती हैं….
आज कल के लड़कों को ये लडकियां समझती हैं…..
चाहतों के रंगों से सचिन और दिल के कोरे कागज़ पर……..
किसका नाम लिखना है….अंगुलियाँ समझतीं हैं….
चुप कहाँ पर रहना है….सचिन और किस जगह खनकना है…..
जानते हैं..ये कंगन के चूडियाँ समझतीं हैं….
आंसुओं को आँखों मैं कैद करके रखा है..सचिन …
किस जगह बरसना है…के बदलियाँ समझती हैं…
हसरतें हैं क्या दिल मैं सचिन ….खुल के कह नही पातीं….
बाप की गरीबी को सचिन ….बस ये बेटियाँ समझतीं हैं.

मेरे दिल की तमना

सुनाता रहा हूँ तुझे दिल की बातें ,तेरी आरज़ू में जिए जा रहा हूँ
हूँ मदहोश या मैं दीवाना हूँ तेरा ,तुझे हर तरफ़ हर घड़ी पा रहा हूँ
भटकता रहा मैं रोशनी में भी लेकिन अंधेरो में भी अब तुझे पा रहा हूँ
यूँ चल तो रहा हूँ मगर ना ख़बर हैं ,मैं कैसे कहाँ और किधर जा रहा हूँ
मगर इस यकीं पे मैं चल तो रहा हूँ ,कि हो ना हो तेरे क़रीब आ रहा हूँ
तुझे पाके तुझको ही मांगता हूँ ,तेरी दुआ मैं भी चला आ रहा हूँ
लिखें हैं जो मैने नहीं गीत मेरे ,तेरी धड़कानो को बस गा रहा हूँ